दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग

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जिला विकलांगता पुनर्वास केन्‍द्र (डीडीआरसी)

पृष्‍ठभूमि

अभी भी देश में बहुत से ऐसे जिले हैं, जहॉं विकलांग व्‍यक्तियों के पुनर्वास के लिए किसी प्रकार की बुनियादी सुविधा उपलब्‍ध नहीं है। मंत्रालय देश के सभी असेवित जिलों में,आधारभूत स्‍तर पर विकलांग व्‍यक्तियों को व्‍यापक सुविधाएं उपलब्‍ध करने के लिए, जिला विकलांगता पुनर्वास केन्‍द्र (डीडीआरसी) की स्‍थापना के माध्‍यम से,जागरूकता सृजन, पुनर्वास,जमीनी स्‍तर के कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण / मार्गदर्शन की सुविधाएं प्रदान करने की योजना बना रहा है।

मंत्रालय अपने अधीनस्‍थ कार्यालय, अर्थात् पीडी – डीआरसी के माध्‍यम से और राज्‍य सरकार के परामर्श से, डीडीआरसी की स्‍थापना करने के लिए,उपयुक्‍त जिला और मौजूदा कार्यान्‍वयन एजेंसियों में से उपयुक्‍त कार्यान्‍वयन एजेंसी (जिला रेड क्रॉस सोसायटी / अन्‍य पंजीकृत सरकारी संगठन / गैर सरकारी संगठन / स्‍व- सहायता समूह) के चयन को अंतिम रूप देगा और तीन वर्ष (पूर्वोत्‍तर राज्‍यों और जम्‍मु एवं कश्‍मीर के मामले में पॉंच वर्ष) के बाद, यदि आवश्‍यकता हुई तो प्रभावी हस्‍तांतरण करने के लिए इसे सुदृढ़ करेगा। विहित मानदंडों के अनुसार, 3 / 5 वर्ष की प्रारंभिक अवधि के लिए, जिला अधिकारी के माध्‍यम से अनुरोध प्राप्‍त होने पर डीडीआरसी को मंत्रालय से निधि उपलब्‍ध कराई जाएगी। इस प्रस्‍ताव के साथ, प्राप्‍त हुई पिछली किस्‍त का लेखा परीक्षित व्‍यय –विवरण और उपयोगिता प्रमाण पत्र भी संलग्‍न होने चाहिए। 3 / 5 वर्ष के पश्‍चात, इसके लिए दीनदयाल उपाध्‍याय योजना (जिसे मंत्रालय का छत्र संगठन भी कहा जाता है) के माध्‍यम से गावदुम आधार पर निधीकरण जारी रहेगा।

योजना उद्देश्‍य

जिला विकलांगता पुनर्वास केन्‍द्र (डीडीआरसी) की स्‍थापना जो निम्‍नलिखित के माध्‍यम से विकलांग व्‍यक्तियों को पुनर्वास सहायता उपलब्‍ध करवाएगा :

  • शिविर दृष्टिकोण के माध्‍यम से विकलांग व्‍यक्तियों का सर्वेक्षण एवं उनकी पहचान;
  • विकलांगता की रोकथाम, शीघ्र पता लगाना और अंतर्क्षेप इत्‍यादि को प्रोत्‍साहित करने और बढ़ाने के लिए जागरूकता सृजन
  • शीघ्र अंतर्क्षेप;
  • सहायक उपकरणों की आवश्‍यकता, सहायक उपकरणों की व्‍यवस्‍था / फिटमेंट, सहायक उपकरणों की जॉंच / मरम्‍मत
  • उपचारात्‍मक सेवाएं, यथा,भौतिक चिकित्‍सा (फिजियोथैरेपी), व्‍यावसायिक रोगोपचार, वाक् उपचार इत्‍यादि;
  • विकलांग व्‍यक्तियों के लिए विकलांगता प्रमाण पत्र, बस पास अैर अन्‍य रियायत / सुविधाएं सुगम करना;
  • सरकारी एवं धर्मार्थ संस्‍थाओं के माध्‍यम से रेफरल और शल्‍य सुधार की व्‍यवस्‍था;
  • स्‍वरोजगार हेतु बैंक एवं अन्‍य वित्‍तीय संस्‍थाओं के माध्‍यम से ऋण की व्‍यवस्‍था करना;
  • विकलांग व्‍यक्तियों, उनके माता – पिता एवं परिवार के सदस्‍यों को सलाह देना;
  • बाधारहित परिवेश का संवर्धन;
  • निम्‍नलिखित के माध्‍यम से विकलांग व्‍यक्तियों के लिए शिक्षा, व्‍यावसायिक प्रशिक्षण और नियोजन के संवर्धन करने हेतु सहायक एवं पूरक सेवाएं प्रदान करना :-
  • शिक्षकों, समुदाय और परिवारों को अनुस्‍थापन (ओरियंटेशन) प्रशिक्षण प्रदान कर
  • शीघ्र प्रेरण और शिक्षा, व्‍यावसायिक प्रशिक्षण और नियोजन हेतु शीघ्र उत्‍तेजन हेतु विकलांग व्‍यक्तियों को प्रशिक्षण प्रदान कर।
  • स्‍थानीय संसाधन को ध्‍यान में रखते हुए विकलांग व्‍यक्तियों के लिए उपयुक्‍त व्‍यवसाय की पहचान करना अैर व्‍यासायिक प्रशिक्षण का डिजाइन बनाना और उपलब्‍ध करवा कर और उपयुक्‍त नौकरी की पहचान कर, ताकि उन्‍हें आर्थिक रूप से स्‍वनिर्भर बनाया जा सके।
  • मौजूदा शैक्षणिक प्रशिक्षण,व्‍यावसायिक संस्‍थानों के लिए रेफरल सेवा प्रदान कर।  

 

जिला का चयन –

जिला का चयन आवश्‍यकता आधारित होगा। जैसा कि पूर्व में इंगित किया गया है कि मंत्रालय अब देश के सिर्फ असेवित जिलों में डीडीआरसी स्‍थापित करने का प्रस्‍ताव करता है। जैसा कि ऐसे जिलों में विकलांगता के क्षेत्र में कोई गैर सरकारी संगठन कार्य नहीं कर रहा होगा, इसलिए तीन वर्ष की प्रारंभिक अवधि में डीडीआरसी प्रतिष्‍ठान को राज्‍य सरकार के सक्रिय सहयोग से मंत्रालय द्वारा समन्‍वयित और निर्देशित किया जाएगा। इससे प्रौद्योगिकी का उचित हस्‍तांतरण, क्षमता वर्द्धन और कार्य रणनीति में एकरूपता सुनिश्चित होगी। इसके अलावा,उपयुक्‍त भवन और अवसंरचना की उपलब्‍धता, विकलांगताओं के मामले, राज्‍य सरकार का सहयोग, निकटतम डीडीआरसी अथवा समतुल्‍य सेवा केन्‍द्र इत्‍यादि से दूरी भी, जिलों के चयन हेतु महत्‍वपूर्ण मापदंड होंगे।

 

निगरानी और समन्‍वयन

प्रत्‍येक डीडीआरसी को एक जिला प्रबंधन न्‍यास, भारत सरकार (प्रारंभिक 3/5 वर्ष के लिए) स्‍वास्‍थ्‍य विभाग, पंचायत राज, ग्रामीण विकास, कल्‍याण, महिला एवं बाल विकास, श्रम एवं नियोजन, शिक्षा इत्‍यादि के अंतर्गत संचालित होंगे। उनके अलावा, इस टीम में कार्यान्‍वयन एजेंसी के नोडल अधिकारी और प्रतिष्ठित गैर सरकारी संगठनों के प्रतिनिधि / जन प्रतिनिधि शामिल होंगे। यह टीम इस केन्‍द्र की आस्तियों का अभिरक्षक भी होगी। बेहतर समन्‍वयन के लिए यह वांछित होगा कि डीडीआरसी के कार्यकलाप की निगरानी करने और समन्‍वयन करने के लिए जिला प्राधिकारियों में से चयनित एक नोडल अधिकारी डीएमटी में शामिल हो।

डीएमटी के महत्‍वपूर्ण कार्य इस प्रकार हैं:

  • पंजीकृत कार्यान्‍वयन अभिकरण का चयन
  • मानव बल का प्रस्‍तरण और उनकी नियुक्ति शर्तों को अंतिम रूप देना
  • हस्‍तांतरण के पश्‍चात भी डीडीआरसी के कार्यकलापों की निगरानी, समन्‍वयन
  • जिले की अन्‍य गतिविधियों के साथ अभिसरण
  • डीडीआरसी के माध्‍यम से प्रदत्त विभिन्‍न सेवाओं के लिए प्रभार तय करना और संसाधन जुटाने के लिए अन्‍य स्रोतों की पहचान करना।
  • डीडीआरसी की आस्तियों और एडिप इत्‍यादि के अंतर्गत प्राप्‍त सामग्रियों की सुरक्षा।

इस टीम की बैठक माह में एक बार हो सकती है, परंतु एक वर्ष में कम से कम चार बार होनी चाहिए।

 

नये डीडीआरसी के लिए एक उपयुक्‍त अभिकरण की स्‍थापना करने के लिए कार्यान्‍वयन अभिकरण का चयन।

जहॉं तक संभव हो, डीएमटी को नये डीडीआरसी की स्‍थापना के बाद से ही एक उपयुक्‍त अभि‍करण की पहचान करनी चाहिए। कार्यशील जिला रेडक्रॉस सोसायटी / राज्‍य स्‍वास्थ्य विभाग के पंजीकृत अभिकरण को गैर सरकारी संगठनों के सापेक्ष वरीयता दी जानी चाहिए। डीएमटी, स्‍थानीय प्रचार के माध्‍यम से ईच्‍छुक पंजीकृत संगठनों से प्रस्‍ताव आमंत्रित कर सकती है और फिर मंत्रालय के परामर्श से, उनमें से सबसे उपयुक्त का चयन कर सकती है।

 

डीडीआरसी की अवस्थिति एवं स्‍थान आवश्‍यकता

राज्‍य सरकार को किराया मुक्‍त,अच्‍छी सड़क सुविधा वाला भवन स्‍थान, जहॉं पानी और विद्युत का पर्याप्‍त प्रावधान हो, उपलब्‍ध कराना है। अच्‍छा होगा यदि डीडीआरसी जिला अस्‍पतालों में अवस्थित हो। यदि वहां स्‍थान उपलब्‍ध न हो तो पास के किसी भवन की पहचान की जानी चाहिए। न्‍यूनतम आवश्‍यक स्‍थान करीब 150 वर्ग मीटर है। फिजियोथेरेपी / शीघ्र अंतर्क्षेप इकाई, कार्यशाला स्‍टोर, परामर्श और स्‍वागत हेतु कमरों की आवश्‍यकता होगी। अवसंरचना सुधार / निर्माण, जैसे भवन को बाधामुक्‍त बनाने के लिए संसद सदस्‍य स्‍थानीय क्षेत्र विकास निधि का उपयोग की संभावना तलाशी जा सकती है।

 

अनुमत मानव बल

प्रत्‍येक डीडीआरसी में निश्चित मानदेय और पूर्व निर्धारित अर्हता वाले निम्‍नलिखित विषयों से संबंधित एक – एक कर्मचारी / अधिकारी होगा। पुनर्वास पेशेवर अधिमानत: भारतीय पुनर्वास परिषद (आरसीआई) से पंजीकृत होने चाहिए। 

प्रत्‍येक डीडीआरसी में निश्चित मानदेय और पूर्व निर्धारित अर्हता वाले निम्‍नलिखित विषयों
क्रम सं. पद अधिकतम मानदेय प्रतिमाह (रुपए में) अर्हता
1 नैदानिक मनोविज्ञानी / मनोवैज्ञानिक 6,000 / 5000 संशोधित कर 8200 रुपए नैदानिक मनोविज्ञान में एम. फिल. / मनोविज्ञान में एम.ए; अधिमानत: विकलांगता पुनर्वास में 2 वर्ष का अनुभव़
2 वरिष्‍ठ भौतिक चिकित्‍सक / व्‍यावसायिक चिकित्‍सक 8200 (संशोधित) 5 वर्ष के अनुभव के साथ सं‍बंधित विषय में स्‍नातकोत्‍तर
3 अस्थि विकलांग वरिष्‍ठ प्रोस्‍थेटिस्‍ट / ऑर्थोटिस्‍ट 8200 (संशोधित) 5 वर्ष के अनुभव के साथ प्रोस्‍थेटिक और ऑर्थोटिक में डिग्री अधिमानत: राष्‍ट्रीय संस्‍थान से अथवा 6 वर्ष के अनुभव के साथ प्रोस्‍थेटिक और ऑर्थोटिक मे डिप्‍लोमा
4 प्रोस्‍थेटिस्‍ट ऑर्थोटिस्‍ट (तकनीशियन) 5800 (संशोधित) 2/3 वर्ष के अनुभव के साथ आईटीआई प्रशिक्षित
5 वरिष्‍ठ वाक् चिकित्‍सक / श्रवण विज्ञानी 5800 (संशोधित) संबंधित विषय में स्‍नातकोत्‍तर / बी. एस. सी (वाक. एवं श्रवण)
6 ईयरमाउल्‍ड तकनीशियन – सह – श्रवण यंत्र मरम्‍मतकर्ता 5800 (संशोधित) श्रवण सहायक यंत्र मरम्‍मत / ईयर माउल्‍ड निर्माण में जानकारी के साथ वाक एवं श्रवण में डिप्‍लोमा
7 चलन प्रशिक्षक 5800 (संशोधित) मैट्रिक + चलन में सर्टिफिकेट / डिप्‍लोमा
8 बहु उद्देशीय पुनर्वास कर्मी 5800 (संशोधित) सीबीआर / एमआरडब्‍ल्‍यू पाठ्यक्रम में डिप्लोमा के साथ 10+2 अथवा दो वर्ष के अनुभव के साथ बचपन विशेष शिक्षा में एकवर्षीय डिप्‍लोमा पाठ्यक्रम
9 सामान्‍य कर्मचारी लिपिक / लेखाकार सह भंडारी 5800 (संशोधित) 2 वर्ष के अनुभव के साथ बी. कॉम. / एसएएस
10 परिचारक / चपरासी / संदेशवाहक 3800 (संशोधित) 8 वां पास

उपर्युक्‍त स्‍कीम में किसी स्‍थायी पद का सृजन परिकल्पित नहीं है। यह सेवा मानद् / मानदेय / संविदात्‍मक आधार पर नियुक्‍त कर्मचारी / अधिकारीके माध्‍यम से प्रदान की जानी चाहिए। इस योजना के अंतर्गत मानव बल पर कुल व्‍यय 5.64 लाख रुपए प्रतिवर्ष से अधिक नहीं होना चाहिए। मानदेय के लिए सुरक्षित निधि को अतिरिक्‍त मानव बल के लिए उपयोग नहीं किया जा सकता है (अर्थात् इस योजना के अंतर्गत विहित मानव बल से अधिक)

ये केन्‍द्र असेवित जिलों में स्‍थापित किए जाने हेतु प्रस्‍तावित हैं, जहॉंप्रारंभ में संगत योग्‍यता वाले उम्‍मीदवारढुंढना कठिन होगा। इसलिए डीएमटी, मंत्रालय के पूर्वानुमोदन से निम्‍नतर योग्‍यता वाले कर्मी की भर्ती कर सकती है और समानुपातिक रूप से मानदेयमेंकमी कर सकती है।

नियोजन की पद्धति

डीडीआरसी के लिए मानवबल की पहचान / चयन,जहॉं तक संभव हो निम्‍नलिखित प्राथमिकता के आधार पर स्‍थानीय संसाधन के माध्‍यम से कार्यान्‍वयन एजेंसी और जिला प्रबंधन टीम द्वारा, किया जाएगा :-

  1. मानद् आधार पर सरकारी / जिला अस्‍पताल के मौजूदा पेशेवर
  2. टोकन मानदेय के भुगतान परसरकारी / जिला अस्‍पताल के मौजूदा पेशेवर
  3. शुद्धत: संविदात्‍मक आधार पर पेशेवर और अन्‍य 

 

उपस्‍कर

सभी प्रकार की विकलांगताओं से संबंधित सहायक उपकरणों के संविरचन और निर्धारण के लिए उपस्‍कर इस स्‍कीम से खरीदे जा सकते हैं। ये उपस्‍कर विद्युत भट्ठी, कार्यशाला सन्‍दान, भौतिक चिकित्‍सा उपकरण, नैदानिक ऑडियोमीटर, वाक प्रशिक्षक, कार्यशाला औजार और मानसिक मंद बच्‍चों के लिए शिक्षण सामग्री हो सकते हैं। प्रथम वर्ष में प्रति डीडीआरसी 5 लाख रुपए का गैर आवर्ती व्‍यय इसी प्रयोजन के लिए रखा गया है। उपस्‍कर का विवरण अनुलग्‍नक 1 में सूचीबद्ध है।

 

सहायक यंत्रों एवं उपकरणों के लिए सामग्री :-

सहायक उपकरण एवं सहायक यंत्रों एवं उपकरणों की संविरचन सामग्री की आपूर्ति भारत सरकार द्वारा द्वारा एडिप योजना के अंतर्गत की जाएगी। इस योजना के अंतर्गत अनुदान प्राप्‍त करने के लिए डीडीआरसी को, उपयोगिता प्रमाणपत्र, लेखापरीक्षित व्‍यय विवरण, लाभार्थियों की सूची, सहायक यंत्रों एवं उपकरणों का ब्‍यौरा और गतिविधि कैलेंडर के साथ विहित प्रपत्र में वार्षिक प्रस्‍ताव जिला अधिकारी के माध्‍यम से सुविधा उपलब्‍ध कराने वाली एजेंसी (एनआई / एलिमको) / परियोजना निदेशक, डीआरसी योजना, भारत सरकार को प्रस्‍तुत करना होगा।

 

पूंजीगत व्‍यय के माध्‍यम से और बढ़ी हुई सेवा सरगम द्वारा अतिरिक्‍त सुदृढीकरण

यह कार्य डीएमटी द्वारा अपनी स्‍वयं की निधियों (एमपीलैड, एमएलए निधि, दान, इत्‍यादि) के उपयोग से किया जा सकता है।

 

व्‍यावसायिक कर्मचारियों को प्रशिक्षण और कार्यालय व्‍यय :-

राष्‍ट्रीय संस्‍थान अपने स्‍वयं के बजट शीर्ष से डीडीआरसी के कर्मचारियों को और कार्यान्‍वयन एजेंसियों / एनजीओ को प्रशिक्षण प्रदान करेंगे।

 

अनुमत अनुदान सहायता:-

’’पीडब्‍ल्‍यूडी अधिनियम का कार्यान्‍वयन’’ योजना के अंतर्गत एक डीडीआरसी के लिए आवर्ती और गैर आवर्ती व्‍यय का अलग अलग ब्‍यौरा निम्‍नवत है: -

(लाख रुपए में)

’’पीडब्‍ल्‍यूडी अधिनियम का कार्यान्‍वयन’’ योजना के अंतर्गत एक डीडीआरसी के लिए आवर्ती और गैर आवर्ती व्‍यय का अलग अलग ब्‍यौरा निम्‍नवत है: -

 

पूर्व संशोधित संशोधित लागत (प्रतिवर्ष)

 

 

पुराने दर सामान्‍य विशेष क्षेत्रों के लिए – 20%वृद्धि
कुल मानदेय 5.64 8.10 9.72
कार्यालय व्‍यय / आ‍कस्मिकताएं 1.50 2.10 2.10
उपकरण 5.00 7.00 7.00
प्रथम वर्ष के लिए कुल 12.14 17.20 18.82
द्वितीय वर्ष के लिए कुल 7.14 10.20 11.82
तृतीय वर्ष के लिए कुल 7.14 10.20 11.82
पीडब्‍ल्‍यू अधिनियम के अंतर्गत कुल व्‍यय 26.42 37.60 42.46

तदोपरांत, गावदुम आधार पर मंत्रालय की दीनदयाल पुनर्वास योजना के माध्‍यम से निधीकरण।

 

वित्‍तीय व्‍यवस्‍था :

अनुदानहेतु स्‍थानीय बैंक में जिला प्रशासन और कार्यान्‍वयन एजेंसी का एक संयुक्‍त खाता खोला जाना चाहिए। शुरु के 3 / 5 वर्ष के पश्‍चात निधि, कार्यान्‍वयन एजेंसी के हाथों में दी जा सकती है अथवा संयुक्‍त खाते में बनाए रखा जा सकता है। डीडीआरसी के लिए चयनित कार्यान्‍वयन एजेंसी के आधार पर डीएमटी द्वारा इस संबंध में निर्णय लिया जा सकता है।

प्रत्‍येक कार्यान्‍वयन एजेंसी द्वारा सहायक गतिविधियों के व्‍यय का यथोचित हिसाब रखा जाएगा। उपयुक्‍त लेखांकन के लिए पहले से अनुपालित प्रक्रियाओं के अलावा, निश्चित रूप से निम्‍न्‍लिखित सुनिश्चित किया जाना चाहिए :

  1. प्रत्‍येक कार्यान्‍वयन एजेंसी, अपने प्रत्‍येक जिला केन्‍द्र के लिए अलग अलग लेखा रखेगा।
  2. प्रत्‍येक जिले के नोडल अधिकारी, एन आई के निदेशक, सीएमडी, एलिमको और पीडी – डीआरसी को, जैसा भी मामला हो अर्द्ध वार्षिक लेखा प्रस्‍तुत करेंगे।
  3. चलाई गयी गतिविधियों के विवरण सहित वार्षिक खाते,एनआई, एलिमिको और डीआरसी द्वारा मंत्रालय को, प्रस्‍तुत किया जाएगा।

 

डीडीआरसी की कार्य योजना

डीडीआरसी की कार्य योजना मुख्‍यत: निम्‍नवत होनी चाहिए :

  • विकलांग व्‍यक्तियों और उनकी आवश्‍यकताओं का सर्वेक्षण – प्रति माह 10 से 15 गांव
  • मुख्‍यालय में मूल्‍यांकन शिविर – सप्‍ताह में दो बार;
  • सिविल अस्‍पताल में – प्रत्‍येक सप्‍ताह एकबार
  • गॉंव में मूल्‍यांकन सह वितरण शिविर – माह में दो बार
  • जागरूकता सृजन कार्यकलाप जैसे स्‍कूल का दौरा / विभिन्‍न लक्षित समूहों के लिए गॉंवों में जागरूकता शिविर / जमीनी स्‍तर के कार्यकर्ताओं के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम – महीने में 4 बार
  • गांवों में अनुवर्ती शिविर – महीने में 4 बार

 

विकलांग व्‍यक्तियों का सर्वेक्षण :

प्रारंभ में योजना बनाने के लिए विकलांगताओं से संबंधित जिला आंकड़ों का ब्‍यौरा, यदि उपलब्‍ध हो, डीडीआरसी को हस्‍तांतरित किया जा सकता है, जैसे प्रत्‍येक गांव में विकलांग व्‍यक्तियों के बारे में ये आंकड़े आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं / अन्‍य जमीनी स्‍तर के पास उपलब्‍ध हो सकता है। आंकड़ों के संग्रह के लिए सर्वोत्‍तम संभव व्‍यवस्‍था के चयन के लिए कार्यान्‍वयन एजेंसी अपने विवेक का उपयोग कर सकती है। चूँकि सर्वेक्षण के ब्‍यौरे का उपयोग डिजाइन की जाने वाली प्रबंधन सूचना प्रणाली के लिए उपयोग किया जाना है, आंकड़ा संग्रहण के लिए अनुलग्‍नक II में दिए गए प्रपत्र का उपयोग किया जाना चाहिए।

 

सहायक उपकरणों के मूल्‍यांकन / फिटमेंट / फोलो अप और मरम्‍मत:

 

मूल्‍यांकन / फिटमेंट :

सहायक उपकरणों का वास्‍तविक फिटमेंट जिला केन्‍द्र की प्रमुख गतिविधियों में से एक होगी। सहायक उपकरणों के फिटमेंट में शिविर दृष्टिकोण और संस्‍थागत दृष्टिकोण के मिश्रण का उपयोग किया जाना चाहिए। सामग्री / सहायक उपकरणों से संबंधित व्‍यय को एडिप योजना से पूरा किया जाना चाहिए। एडिप योजना के अनुसार, ठीक – ठीक व्‍यवस्‍था और लेखा रखने में यथोचित प्रक्रिया का अनुपालन करने के संबंध में कार्यान्‍वयन एजेंसी जिम्‍मेवार होगी। इसके कार्यान्‍वयन के लिए निम्‍न‍लिखित बिन्‍दुओं को नोट किया जाना चाहिए : -

  1. कार्यान्‍वयन एजेंसी को सहायक उपकरणों की आवश्‍यकता के संबंध में ठीक ठीक मूल्‍यांकन सुनिश्चित करना होगा;
  2. जबकि कार्यान्‍वयन एजेंसी तकनीकी इनपुट उपलब्‍ध करता है, संगठनात्‍मक और संभरण जिम्‍मेदारी मुख्‍यत: जिला कल्‍याण अधिकारी (डीडब्‍ल्‍यूओ)/ स्‍थानीय एनजीओ की होगी। कार्यान्‍वयन एजेंसी को डीडब्‍ल्‍यूओ / एनजीओ को प्रारंभ में ही उनकी अपेक्षित भूमिका को स्‍पष्‍ट करना होगा।
  3. सभी विकलांग व्‍यक्तियों का अपेक्षित सहायक उपकरणों की संख्‍या और प्रकार के संबंध में मूल्‍यांकन किया जाना चाहिए।
  4. मूल्‍यांकन, जिला विकलांगता पुनर्वास केन्‍द्र के माध्‍यम से सतत आधार पर और शिविर दृष्टिकोण के माध्‍यम से उपयुक्‍त अवसर पर, दोनों तरह से किया जाता है।
  5. इसे आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं (एडब्‍ल्‍यूडब्‍ल्‍यू), स्‍वास्‍थ्‍य कार्यकर्ताओं, पंचायती राज संस्‍थाओं, स्‍थानीय एनजीओ और अन्‍य जमीनी स्‍तर के कर्मियों के सहयोग से किया जाना चाहिए।

 

सहायक उपकरणों का मरम्‍मत / फोलो - अप:-

  1. कार्यान्‍वयन एजेंसी को सहायक उपकरण उपलब्‍ध कराए गए व्‍यक्तियों का सख्‍त फोलो अप के माध्‍यम से निश्चित रूप से उचित मरम्‍मत सु‍निश्चित करना चाहिए
  2. जिला केन्‍द्र को सहायक उपकरणों की मरम्‍मत सेवा, समायोजन और फोलो अप व्‍यवस्‍था करनी चाहिए। सहायक उपकरणों के मरम्‍मत के लिए नाममात्र की राशि प्रभारित की जानी चाहिए, जो अलग अलग उपकरणों और प्रकारों के अनुसार भिन्‍न होंगे।
  3. उन विकलांग व्‍यक्तियों को जिन्‍हें सहायक उपकरण उपलब्‍ध करवाया गया है को उपलब्‍ध फोलो अप / मरम्‍मत / प्रशिक्षण सेवाओं के बारे में स्‍पष्‍ट रूप से सूचित किया जाना चाहिए।
  4. सहायक उपकरणों के उपयोग और उपचारात्‍मक सेवाओं के संबंध में विकलांग व्‍यक्तियों को भी प्रशिक्षित किया जा सकता है। उपकरण के उपयोग और अनुरक्षण के लिए उन्‍हें नक्शों / चित्रों वाले स्‍थानीय भाषा के पर्चों के रूप में निदेश दिए जा सकते हैं।

 

रोकथाम संवर्धन :-

विभिन्‍न राष्‍ट्रीय कार्यक्रमों जैसे अंधापन, कुष्‍ठ रोकथाम कार्यक्रम इत्‍यादि और सा‍थ ही विभिन्‍न प्रतिरक्षण कार्यक्रम जैसे पल्‍स पोलियो के माध्‍यम से रोकथाम का संवर्धन किया गया है। इन कार्यक्रमों के अनुस्‍थापन को न सिर्फ मृत्‍यु की रोकथाम पर केन्द्रित करने की जरूरत है अपितु विकलांगता पर भी केन्द्रित करने की जरूरत है। इसलिए जिला केन्‍द्रों को स्‍वास्‍थ्‍य कार्यक्रम एवं योजना और विकलांगता रोकथाम के बीच संबद्धता पर जोर देने के लिए रोकथाम संबंधी सूचना प्रसार में संशोधन करने की जरूरत है।

उपयुक्‍त पोषण की कमी को भी विकलांगता के प्रमुख कारण के रूप में जाना जाता है। अध्‍ययन से पता चलता है कि आयोडिन की कमी से मस्तिष्‍क का विकास महत्‍वपूर्ण रूप से प्रभावित करता है। भारत के शि‍शुओं में निम्‍न जन्‍म वजन की अधिक प्रतिशतता,का कारण विभिन्‍न सूक्ष्‍म पोषण की कमी है। गर्भावस्‍था में अपर्याप्‍त वजन की प्राप्ति, जीवित रह जाने वाले शिशुओं में क्षीण मानसिक और प्राणघाती विकास से संबद्ध है। शैशव और प्रारंभिक बचपन के दौरान कूपोषण, बाद की जिंदगी में शारीरिक संवृद्धि और बौद्धिक प्रदर्शन पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है, ऐसा माना जाता है। विटामिन ‘ए’ की कमी बच्‍चों में अंधापन का प्रमुख कारण है।

विकलांगता रोकथाम का एक और पहलू जिसके लिए जिला केन्‍द्र के माध्‍यम से प्रसार की जरूरत है, वह है पर्यावरणीय स्‍वच्‍छता और स्‍वच्‍छ जीवन शैली। उदाहरणार्थ, प्रदूषित पानी से पोलियो विषाणु की वृद्धि कर सकता है, जिससे पोलियो का संक्रमण हो सकता है और शिथिल पक्षाघात हो सकता है। इसीप्रकार, डायरिया से वृद्धि मंदता होने का पता चला है। शि‍थिल पक्षाघात, रोगकारी हालात के कारण भी हो सकता है, जिससे पोलियो हो सकता है। रोगकारी स्थितियों से ऑंखों में ट्रेकॉमा हो सकता है, जिससे अंधापन हो सकता है। रोगकारी स्थितियों के कारण कुष्‍ठ भी हो सकता है। अस्‍वास्‍थ्‍यकारी और रोगकारी भोजन से भी पोलियो होने की सूचना प्राप्‍त हुई है।

जिला केन्‍द्र को विकलांगताओं की रोकथाम के अलग अलग पहलूओं से संबंधित सूचना संग्रह करने और समानु्क्रमित करने और स्‍थानीय स्थितियों के आधार पर सर्वाधिक उपयुक्‍त तरीके और पद्धति से सूचना प्रसार करने की जरूरत है।

इसलिए जिला केन्‍द्र को निम्‍नलिखित तरीके से रोकथाम को बढ़ावा देना चाहिए :

  1. रोकथाम को बढ़ावा देने में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, स्‍वास्‍थ्‍य कार्यकर्ताओं, गैर सरकारी संगठनों की गतिविधियों को अभिमुक्ष करना;
  2. रोकथाम और शीघ्र अंतर्क्षेप विषय पर कार्यान्‍वयन एजेंसी के पास उपलब्‍ध जानकारी का स्‍थानीय भाषा में वितरण और प्रचार करना। इस योजना के शुरु होने के दो महीने के अंदर डीआरसी / राष्‍ट्रीय संस्‍थान के पास उपलब्‍ध सामग्री को संकलित / तैयार किया जा सकता है।
  3. कार्यान्‍वयन एजेंसी,पहचान, रोकथाम और शीघ्र पता लगाने के लक्ष्‍य के साथ,आईसीडी कार्यकर्ताओं, स्‍वास्‍थ्‍य कार्यकर्ताओं, सीबीआरडब्‍ल्‍यू सहित सभी जमीनी स्‍तर के कार्यकर्ताओं के लिए अधिस्‍थापन कार्यक्रम का संचालन कर सकती है। 

 

शीघ्र अंतर्क्षेप:

विकलांगताओं की शीघ्र पहचान और शीघ्र अंतर्क्षेप, द्वितीयक विकलांगताओं के लिए को दूर करने और विकलांग बच्‍चों के सफल एकीकरण सुनिश्चित करने के लिए बहु‍त महत्‍वपूर्ण है।इसलिए प्रत्‍येक डीडीआरसी को निश्चित रूप से एक शीघ्र अंतर्क्षेप इकाई खोलनी चाहिए। विकलांग बच्चों के माता – पिता को इस इकाई में आने के लिए निश्चित रूप से प्रोत्‍साहित किया जाना चाहिए। इसके अतिरिक्‍त उनके निवास स्‍थान पर अंतर्क्षेप जारी रखने के लिए उन्‍हें स्‍थानीय रूप से उपलब्‍ध कम लागत वाली सामग्री का सुझाव दिया जाना चाहिए।

 

बाधामुक्‍त परिवेश:

बाधामुक्‍त परिवेश का प्रावधान, विकलांग व्‍यक्तियों को पहुँच उपलब्‍ध करवाने के लिए सहायक उपकरणों का दूसरा महत्‍वपूर्ण संघटक है;

  1. शहरी कार्य और रोजगार द्वारा प्रचालित मानक उप नियम के अनुसार, मंत्रालय और सभी नये भवन, विशेषकर सार्वजनिक क्षेत्र और सार्वजनिक सुविधा केन्‍द्र, जैसे स्‍कूल और छात्रावास, पंचायत एवं अन्‍य सरकारी भवन, अस्‍पताल, बाजार, बस स्‍टैंड, पार्क, सार्वजनिक शौचालय को बाधामुक्‍त बनाना हे।
  2. मूल जिम्‍मेदारी स्‍थानीय सरकार की होनी चाहिए।
  3. शुरु‍आत में, सार्वजनिक भवन जैसे जिलाधिकारी कार्यालय, जिला अस्‍पताल, स्‍थानीय बस स्‍टैंड, महाविद्यालय एवं स्‍कूल को बाधामुक्‍त बनाया जाना चाहिए।
  4. भवनों के बाधामुक्‍त रूपांतरण के लिए वित्‍तीय सहायता की आवश्‍यकता को स्‍थानीय सरकार की निधि और / अथवा एमपीलैड्स निधि से पूरा किया जा सकता है।

 

शिक्षा / व्‍यावसायिक प्रशिक्षण / नियोजन उपलब्‍ध करवाना:-

  1. शिक्षा, प्रशिक्षण और नियोजन पुनर्वास के महत्‍वपूर्ण भाग हैं :-
  2. वे उपयुक्‍त व्‍यवसाय, संभावित नौकरी और अन्‍य सुविधाओं जैसे एनएचएफडीसी के माध्‍यम से आसान ऋण, वीआरसी इत्‍यादि के माध्‍यम से व्‍यावसायिक प्रशिक्षण के संबंध में सूचना भी प्रदान कर सकते हैं।
  3. 3 दिन से एक सप्‍ताह तक का कम से कम एक अधिस्‍थापन कार्यक्रम प्रत्‍येक छ: माह पर आयोजित किया जाना चाहिए।

 

प्रगति रिपोर्ट :

जिला केन्‍द्र की स्‍थापना करने के कार्यक्रम का कार्यान्‍वयन की निगरानी एवं मूल्‍यांकन, ऊपर सूचीबद्ध गतिविधियों और उनके लिए निर्धारित लक्ष्‍यों के अनुसार किया जाएगा।

  1. नोडल अधिकारी को प्रत्‍येक माह प्रगति रिपोर्ट, एनआई / एलिमको /डीआरसी भेजनी चाहिए।
  2. एनआई / एलिमको / डीआरसी द्वारा तिमाही आधार पर विस्‍तृत प्रगति रिपोर्ट इस मंत्रालय को भेजी जानी चाहिए, जिसमें उनके अंदर आने वाले प्रत्‍येक जिला के लक्ष्‍य और उनके प्रति उपलब्धि का सार होना चाहिए।
  3. अगले वित्‍त वर्ष के लिए कार्य योजना के साथ वार्षिक प्रगति रिपोर्ट, सामाजिक न्‍याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के विकलांगता प्रभाग के संयुक्‍त सचिव को भेजी जाएगी।
  4. सामाजि‍क न्‍याय एवं अधिकारिता मंत्रालय प्रत्‍येक वर्ष प्रतिदर्श आधार पर इन जिला केन्‍द्रों के कार्यकलाप का वाह्य एजेंसियों द्वारा मूल्‍यांकन करवाएगा।

भौतिक, वित्‍तीय और कर्मचारी संबंधी प्रगति रिपोर्ट की प्रस्‍तुति हेतु विहित प्रपत्र अनुलग्‍नक III में दिया गया है।  

अंतिम नवीनीकृत : 21-10-2015