दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय,
भारत सरकार

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दृष्टिकोण और कार्यनीति

दृष्टिकोण और कार्यनीति

योजना का दृष्टिकोण निम्न प्रकार से होगाः

  • सामाजिक नेटवर्किंग के माध्यम से जागरूकता फैलाना।
  • सुगम्य वैबसाइट का अनुरक्षण करना, आदि।
  • सीधे अथवा सामाजिक सक्रिय समूहों/संगठनों के माध्यम से सेमिनारों, कार्यशालाओं, सांस्कृतिक कार्यकलापों, मेलों/प्रदर्शनियों आदि का आयोजन करना।
  • विकलांगता के क्षेत्र मे राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय आयोजनों में भाग लेना।
  • विकलांग व्यक्तियों की विशिष्ट आवश्यकताओं पर, टेक्नोलॉजी, सहायक यंत्रों और उपकरणों आदि सहित, अध्ययन, सर्वेक्षण, परिगणन और मूल्यांकन कार्यक्रम आयोजित करना।
  • विभिन्न विभागों, संगठनों द्वारा क्षेत्र में किये गये प्रयासों का समन्वय करना और समेकन करना।
  • ‘‘सामाजिक बेहतरी’’ और ‘‘समुदाय कल्याण’’ के विकास हेतु कार्यरत स्व-सहायता समूहों, अभिभावकों, संगठनों आदि को वित्तीय सहायता प्रदान करना।
  • कलाकारों को मानदेय, भोजन, आवास और परिवहन पर आने वाली लागत को वहन करके और इलैक्ट्रानिक मीडिया को देय राशि का भुगतान करके विशुद्ध तौर पर विकलांग व्यक्तियों द्वारा तैयार किये गये और निष्पादित किये गये कार्यक्रमों को दर्शाने जैसे कार्यकलापों को सहायता प्रदान करना।
  • विशेष आयोजन आयोजित करना, विशेष दिनों का आयोजन करना आदि।
  • स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास और उपकरणों के क्षेत्र में विभिन्न सेवा प्रदाताओं के बीच समन्वय की कमी उनकी प्रभावकाारिता को  कम करती है। स्वास्थ्य, शिक्षा, श्रम और ग्रामीण विकास मंत्रालय भी विकलांगता के क्षेत्र में कुछ कार्य कर रहे हैं। ऐसे कार्यक्रमों के सफल कार्यान्वयन हेतु विभाग के अधीन एक अंतर-मंत्रालय समिति का, जो सेवाओं के वितरण  और रेफरल सिस्टम में सुधार करने, संयुक्त उद्यमों का संवर्धन करने, संयुक्त समझौते करने, ज्ञान और विशेषज्ञता का आदान-प्रदान करने, विशेषज्ञ शिक्षक और प्रसार प्रणाली को साझा करने हेतु समस्त संगठनों के बीच समन्वय कर सके, गठन करना।
  • पंचायत संस्थााओं को, जहां कहीं अपेक्षित हो, शामिल करना।

अंतिम नवीनीकृत : 19-02-2016