दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय,
भारत सरकार

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योजना के अंतर्गत सहायता हेतु स्वीकार्य घटक

योजना के अंतर्गत सहायता हेतु स्वीकार्य घटक

सरकार निम्नलिखित कार्य या तो स्वयं कर सकती है अथवा डिसेबिलिटी कार्य विभाग के लोगो के अधीन ऐसे कार्यकलाप किये जाने हेतु आवेदन पत्र आंमत्रित कर सकती है अथवा विभिन्न संगठनों द्वारा स्वेच्छा से प्रस्तुत किये गये प्रस्तावों पर विचार कर सकती है।

1)    हैल्पलाईन (2 करोड़ रूपये तक वार्षिक आकलित व्यय)

विकलांगों को उनके अधिकारों, केन्द्र सरकार के मंत्रालयों/विभागों, राज्य सरकारों और अन्य संगठनों द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं के प्रावधानों के आनलाईन पराशर्मन हेतु एक हैल्पलाईन स्थापित की जायेगी। हैल्पलाईन एक बी.पी.ओ. के माध्यम से अनुरक्षित और संचालित की जा सकती है। विभाग कार्य सुपर्द किये गये बीपीओ को आवश्यक निवेश/प्रशिक्षण मुहैया करायेगा जो अन्यों के साथ-साथ अपने आपको सरकार और सिविल सोसाइटी की नई योजनाओं और कार्यक्रमों से अद्यतन रखेगा।

इसके परिणामस्वरूप यह शिकायत दर्ज करके और/अथवा अपनी समस्याओं को पंजीकृत करके, जिन्हें बीपीओ द्वारा संबंधित अधिकारियों को अगे्रषित किया जायेगा, विकलांग व्यक्तियों को सहायता भी प्रदान करेगी।

(ii)   विषय-वस्तु तैयारी, प्रकाषन और न्यू मीडिया (1 करोड़ रूपये तक आकलित वार्षिक व्यय)

डिसेबिलिटी कार्य विभाग विकलांग व्यक्तियों, सिविल सोसाइटी और अन्य स्टेकहोल्डर्स के बीच जागरूकता सृजन हेतु उचित प्रकाशनों, पैन्फ्लैटों, हैंडआउटस का प्रकाशन करेगा। प्रिंट सामग्री में विभिन्न मंत्रालयों/विभागों/राज्यों/संगठनों द्वारा विकलांगता पर संचालित विभिन्न कार्यक्रमों और योजनाओं; कारणों, निवारण, निदानों; उपचार और पुनर्वास सेवाओं की उपलब्धता; प्रौद्योगिकी, विशेषज्ञता पर साम्रगी, लागत प्रभावी विकास हेतु अनुकूलित अनुसंधान, प्रयोक्ता अनुकूल और टिकाऊ यंत्रों आदि पर महत्वपूर्ण डाटा शामिल होगा।

उपर्युक्त उद्देश्यार्थ प्रिंट में न्यू मीडिया सहित इलैक्ट्रानिक, आडियो/वीडियो, ब्रेल, संकेत भाषा के प्रचार के सभी प्लेटफार्म उपलब्ध होंगे।

उपर्युक्त उद्देश्यार्थ प्रिंट में न्यू मीडिया सहित इलैक्ट्रानिक, आडियो/वीडियो, ब्रेल, संकेत भाषा के प्रचार के सभी प्लेटफार्म उपलब्ध होंगे।

सरकार निम्नलिखित पर भी विचार करेगी।

(क)   विकलांगता पर सर्वोत्तम प्रकाशित सामग्री/पुस्तक हेतु वार्षिक पुरस्कार।

(ख)   विभाग के एक अलग सैल द्वारा एक द्विमासिक पत्रिका प्रकाशित की जायेगी जिसमें विभिन्न व्यक्तियों और संगठनों द्वारा प्रेषित उनकी सफलता की कहानियां, साक्षरता सामग्री, विकलांग व्यक्तियों से संबंधित चालू कार्यकलाप प्रकाशित किये जायेंगे।

(ग)    विकलांगता के प्रचलन, उससे संबंधित स्वास्थ्य परिस्थितियों जैसी विकलांगता के अभिलक्षणों की विस्तृत जानकारी प्राप्त करने हेतु समर्पित सर्वेक्षण हेतु पुनर्वासन सहित सेवाओं का इस्तेमाल और उनकी आवश्यकता आवश्यक होगा। ऐसे सर्वेक्षण विकलांगता और स्वास्थ्य के क्षेत्र में कार्यरत संगठनों के तहत किये जा सकते हैं।

(घ)    विश्वभर में सर्कुलेशन हेतु  बेहतर पद्धतियों के सार संग्रह के समेकन के लिए अध्ययन समूह का गठन करना।

(iii) आयोजन

सरकार राष्ट्रीय आयोजन आयोजित कर सकती है, अंतर्राष्ट्रीय आयोजनों में भाग ले सकती है अथवा गैर-सरकारी संगठनों अथवा स्व-सहायता समूहों द्वारा आयेाजित किये जाने वाले विभिन्न आयोजनों को सहायता प्रदान कर सकती है अथवा उनके द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में आयोजित किये जाने वाले इस प्रकार के कार्यक्रमों को सहायता प्रदान कर सकती है। ऐसे आयोजनों पर वार्षिक आकलित व्यय निम्न प्रकार से होगाः-

(क)   विभाग द्वारा राष्ट्रीय पुरस्कारों और समर्थ आदि सहित राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित कार्यक्रम।

ऐसे आयोजनों में सभी प्रकार की लागत शामिल होती है। ऐसे कार्यक्रमों में प्रतियोगिताओं का आयेाजन करना और पुरस्कार प्रदान करना; जनता के देखने के लिए  मंच प्रदर्शन करना; विकलांग व्यक्तियों द्वारा निर्मित पेंटिग्ंस और विकलांग व्यक्तियों द्वारा सृजित उत्पादों की प्रदर्शनियां लगाना और फिल्म समारोह आयोजित करना आदि शामिल हो सकते हैं।

(ख)   अंतर्राष्ट्रीय आयेाजन 

सीआरपीडी की प्रस्तावना में यह अभिस्वीकृत किया गया है कि विकलांगता एक विकासात्मक अवधारणा है परन्तु उसमें इस बात पर भी बल दिया गया है कि विकलांगता बाधित व्यक्तियों के बीच अंतक्रिया से और मनोवृतिक और वातावरणिक बाधाओं से, जो समाज में अन्यों के साथ समान आधार पर उनकी संपूर्ण और प्रभावी सहभागिता को बाधित करती है, सृजित होती है।

विकलांगता के प्रति नकारात्मक दृष्टिकोण से विकलांग व्यक्तियों का उपचार नकारात्मक हो सकता है; उनका विकलांग बच्चों और वयस्कों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है, जिसके परिणामस्वरूप उनमें कम आत्मसम्मान और कम सहभागिता जैसी नकारात्मक सोच विकसित हो सकती है। वे लोग जो अपनी विकलांगता के कारण पीड़ा महसूस करते हैं स्थानों पर जाने से बचते हैं, अपनी दिनचर्याओं में परिवर्तन कर लेते हैं अथवा अपने घरों से बाहर निकलने से बचते हैं।

इस कलंक और भेदभाव का सामाजिक अनुसंधान के माध्यम से सामना किया जा सकता है। कलंक का सामना करने हेतु कार्यनीतियां तैयार करने के लिए कांफे्रसों, सेमिनारों आदि का आयोजन करने के दूरगामी परिणाम प्राप्त हो सकते हैं।

(ग)    गैर-सरकारी संगठन कार्यक्रमः

योजना के अंतर्गत अंतरपरस्पर संवाद, नुक्कड़ नाटकों, फिल्म प्रदर्शनों, रोड़ शो आदि द्वारा स्व-सहायता और पैरवी समूहों हेतु, विकलांगता के प्रति सामाजिक दृष्टिकोण में परिवर्तन लाने हेतु अभिभावकों और समुदाय की संलिप्तता; विकलांग व्यक्तियों और उनके परिवारों हेतु व्यक्तिगत अथवा समूह आधारित शैक्षिक, मनोवैज्ञानिक और भावानात्मक सहायता सेवाओं हेतु अनुदान प्रदान किया जा सकता है।

ऐसे कार्यकलापों हेतु विचारणीय विषय सार्वभौमिक होगा। आत्मनिर्भरता और सामाजिक संबंधों के संवर्धन में संस्थागत सेवायें सीमित रही है। जहां सामुदायिक सेवायें विद्यमान होती हैं वहां विकलांग व्यक्ति उनका चयन करने और उन पर नियत्रंण करने में कम दिलचस्पी लेते हैं। विकलांग व्यक्ति पेशेवरों के साथ आमतौर पर असमानता और सहायता के तौर पर संबंध बनाते हैं। ऐसे संबंधों से अवांछित निर्भरता विकसित होती है। विकलांगता अधिकार संगठनों, समुदाय आधारित पुनर्वासन संगठनों, स्व-पैरवी समूहों अथवा अन्य सामूहिक नेटवर्क के सामूहिक प्रयास विकलांग व्यक्तियों को उनकी आवश्यकताओं की पहचान करने के सक्षम बना सकते है। योजना के अंतर्गत स्वास्थ्य और पुनर्वास सेवाओं, श्रम बाजार कार्यक्रमों, व्यावसायिक प्रशिक्षण, शैक्षिक, विकलांगता सामाजिक बीमा लाभ सामाजिक सहायता, विकलांगता लाभ, सहायक उपकरण मुहैया कराने, परिवहन तक सब्सिडिकृत पहुंच बनाने,  सब्सिडिकृत उपयोगिता, संकेत भाषा दुभाषिया सहायता सेवायें मुहैया कराने जैसे आर्थिक कार्यकलापों में संलग्न संगठनों को धन मुहैया कराया जा सकता है। सामाजिक अलगाव, तनाव प्रबंधन आदि सहित गैर-आर्थिक कार्यकलापों को भी, जिनका परिकलन करना कठिन है,  योजना के अंतर्गत सहायता प्रदान की जा सकती है।

(घ)    उपर्युक्त संगठनों द्वारा आयोजित राज्य/जिला स्तरीय कार्यक्रम।

(iv)  कामर्शियल संस्थानों और नियोजकों को सुगा्रही बनाने हेतु स्वैच्छिक सेवा/आउटरीच कार्यक्रम।

अब तक विकलांग व्यक्तियों के सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण हेतु सार्वजनिक क्षेत्र और कारपोरेट सैक्टर पर ध्यान केन्द्रित रहा है। ऐसे व्यक्तियों को प्राइवेट सैक्टर, विशेषकर दुकानों और लघु कामर्शियल संस्थाओं में कर्मचारियों के तौर पर नियोजित करने की काफी संभावनायें विद्यमान हैं। स्वयं सेवकों के माध्यम से अथवा नियोजकों को प्रोत्साहित करके लघु संस्थाओं के सुग्राहीकरण द्वारा ’’प्रति एक-अपनाएं एक’’ की अवधारणा कार्यान्वित की जा सकती है। स्वयं सेवकों के माध्यम से क्षेत्रवार/बाजारवार प्रचार अभियान चलाये जा सकते हैं।

(v)   मनोरंजन और पर्यटन

 मानव मनोवृत्ति पर विश्राम, परिवर्तन, उपचार, मनो-धार्मिक राहत अथवा शिक्षा हेतु मनोरंजन, यात्रा और बहिर भ्रमण का अनुकूल प्रभाव सिद्ध हो चुका है और विकलांग व्यक्ति भी इससे अछूते नहीं हैं। यात्रा और पर्यटन से अनाश्रयता सृजित होती है जिसके परिणामस्वरूप विश्व भर में ज्ञानोदय होता है। इसलिए योजना के अंतर्गत निम्नलिखित सुविधाओं का संवर्धन करने में संलग्न संस्थायें/गैर-सरकारी संगठन भी निम्नलिखित हेतु अनुदान प्राप्त करने के पात्र होंगेः-

(क)   उन पर्यटन स्थलों/अन्य स्थानों और वातावरणों की पहचान करना जिन स्थानों पर पर्यटन करने से मानसिक मन्द व्यक्तियों को लाभ प्राप्त हो सके और समूहों का ऐसे स्थानों का भ्रमण कराना।

(ख)   नियमित अस्पतालों को छोड़कर उन स्थानों की पहचान करना जहां किसी प्रकार की विकलांगता से ग्रस्त व्यक्तियों को इलाज/उपचार लाभ अथवा दिलासा प्राप्त हो सके और इस उद्देश्यार्थ पैकेज तैयार करना।

(ग)    उन केन्द्रों की, जहां विकलांग व्यक्ति सहायक उपकरणों के साथ अथवा उनके बिना अपनी क्षमताओं के संबंध में प्रारंभिक  सहायता सूचना/पूरी सूचना प्राप्त कर सके, पहचान करना/विकास करना।

(घ)    उपर्युक्त स्थानों को सुगम्य बनाना।

प्रति समूह हेतु कुल लागत की, जिसमें विकलांग व्यक्तियों का यात्रा, आवास, भोजन और साथ रहने हेतु अपेक्षित परिचरों/शिक्षकों की न्यूनतम संख्या शामिल है, 2 लाख रूपये की अधिकतम सीमा के साथ 70ःतक की वित्तीय सहायता स्वीकार्य होगी।

(ड.)   संगीत, पठन, ड्राइंग और पेंटिंग आदि जैसी मनोरंजनात्मक सुविधाओं का सृजन करना।

(vi)  समुदाय रेडियो में सहभागिताः

समुदाय रेडियो स्टेशन के स्वामी और/अथवा आपरेट कर रहे गैर-सरकारी संगठन, पैरवी समूह और सामाजिक सशक्तिकरण और विकलांग व्यक्तियों में जागरूकता सृजित करने के कार्य के कार्य में संलग्न अन्य गैर-लाभ संगठन सूचना और प्रसारण मंत्रालय द्वारा जारी किये गये दिशा-निदेशों के अनुसार समिति द्वारा योजना के अनुसार निर्णित किये गये अनुसार वित्तीय सहायता प्राप्त करने के पात्र होंगे।

(vii) प्रैस/मीडिया दौरे और अन्य मीडिया विषिष्ट कार्यकलाप

कार्यकलाप में विकलांग व्यक्तियों के हित में मीडिया को सुग्राही बनाने सहित प्रैस/मीडिया दौरे, मीडिया वर्कशाप और अन्य विशिष्ट मीडिया कार्यकलाप शामिल होंगे। इनमें अन्यों के साथ राज्य सरकारों की प्रचार यूनिटें शामिल होंगी। इस उद्देश्यार्थ डीएवीपी के गीत और नाटक प्रभाग, फिल्म प्रचार विभाग का इस्तेमाल किया जा सकता है।

(viii) ब्रांड एंबेसडर                                            

सरकार योजना के अंतर्गत समस्त कार्यकलापों को गतिशील बनाने हेतु एक ब्रांड एंबेसडर नियुक्त करने हेतु विचार कर सकती है।

अंतिम नवीनीकृत : 19-02-2016